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ITR Filing Update 2026: दूसरी इनकम वालों को भरना होगा ITR-2 फॉर्म

May 28, 2026 Source: Indivox News

ITR Filing Update 2026: दूसरी इनकम वालों को भरना होगा ITR-2 फॉर्म
इनकम टै्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) के लिए ITR-2 फॉर्म की Excel Utility जारी कर दी है। अब टैक्सपेयर्स अपने टैक्स रिटर्न की तैयारी पहले से शुरू कर सकते हैं। इससे पहले विभाग ने ITR-1 और ITR-4 की सुविधा भी शुरू की थी। नई Excel Utility के जरिए लोग बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी अपना टैक्स डेटा भर सकते हैं और बाद में JSON फाइल बनाकर उसे इनकम टैक्स पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। ITR-2 उन लोगों के लिए जरूरी होता है जिनकी कमाई केवल सैलरी तक सीमित नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की इनकम शेयर मार्केट, कैपिटल गेन, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी, विदेशी संपत्ति या अन्य स्रोतों से भी होती है, तो उसे ITR-2 फाइल करना होगा। पहली बार रिटर्न फाइल करने वाले यूजर्स को PAN और Aadhaar की मदद से पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। वहीं बिजनेस कैटेगरी के कुछ टैक्सपेयर्स के लिए डेडलाइन 31 अगस्त 2026 है। अगर कोई व्यक्ति तय समय तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाता, तो वह 31 दिसंबर तक ‘Belated Return’ दाखिल कर सकता है, लेकिन इसके लिए पेनल्टी देनी पड़ सकती है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को जल्दबाजी में रिटर्न फाइल नहीं करना चाहिए। कंपनियों को TDS डेटा जमा करने के लिए 31 मई तक का समय दिया गया है। इसके बाद Form 26AS और AIS में जानकारी अपडेट होने में लगभग 10 से 15 दिन लग सकते हैं। ऐसे में 15 जून से पहले रिटर्न फाइल करने पर डेटा mismatch होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है। रिटर्न फाइल करने से पहले कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स और डिटेल्स की जांच करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको अपने एम्प्लॉयर से Form 16 मिल गया हो। इसके अलावा AIS और TIS में बैंक ब्याज, शेयर बाजार निवेश और अन्य लेन-देन की जानकारी सही तरीके से अपडेट होनी चाहिए। साथ ही आपका मोबाइल नंबर Aadhaar और PAN दोनों से लिंक होना चाहिए, ताकि e-verification की प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके। इस बार इनकम टैक्स विभाग की नई सुविधा से टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा आसान और डिजिटल हो गई है। सही दस्तावेजों और समय पर तैयारी के साथ टैक्सपेयर्स आसानी से अपना ITR भर सकते हैं और पेनल्टी या रिफंड में देरी जैसी समस्याओं से बच सकते हैं।