Thursday, June 11, 2026 English edition
Indi Vox News Indi Vox News

Every Voice Matters

World

परमाणु समझौते के करीब अमेरिका-ईरान, होर्मुज स्ट्रेट रहेगा खुला

May 29, 2026 Source: Indivox News

परमाणु समझौते के करीब अमेरिका-ईरान, होर्मुज स्ट्रेट रहेगा खुला
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही परमाणु वार्ता अब एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों ने 60 दिनों के अंतरिम परमाणु समझौते (MoU) पर सहमति बना ली है। यदि यह समझौता औपचारिक रूप से लागू होता है, तो इससे मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक तेल बाजार और अमेरिका-ईरान संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अंतरिम समझौते को लागू करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और वार्ता टीम के प्रमुख जेडी वेंस ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है, हालांकि अंतिम सहमति अभी बाकी है। इस डील का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर है। समझौते के तहत ईरान अगले 30 दिनों के भीतर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखने पर सहमत हुआ है। इसके बाद वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह की रोक या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है और यहां किसी भी तनाव का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह समझौता दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में अंतरिम समझौते की शर्तों को लागू किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में स्थायी और व्यापक परमाणु समझौते पर चर्चा होगी। सऊदी अरब के अल हदथ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को इस अंतरिम समझौते का गारंटर बनाया जा सकता है। हालांकि ईरान ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। समझौते के तहत ईरान ने यह भरोसा दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। हालांकि उसके पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। फिलहाल यह यूरेनियम ईरान के भीतर ही रखा जाएगा। डील में आर्थिक राहत का भी बड़ा पहलू शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर में रोकी गई ईरान की कुछ राशि उसे वापस मिल सकती है। ईरान की मांग है कि समझौते के दौरान उसे कम से कम 12 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वह राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में इसका उपयोग कर सके। इसके अलावा न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि समझौता सफल रहता है तो डोनाल्ड ट्रंप ईरान के तेल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 300 अरब डॉलर तक निवेश कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है और दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता लागू हो जाता है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। साथ ही वैश्विक तेल आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट की आशंकाएं भी घट सकती हैं।