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Housing Projects Fraud: घर खरीदारों के पैसे गायब? SC ने मांगे सभी एजेंसियों से जवाब
May 29, 2026 Source: Indivox News
नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़ा हजारों करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में घर खरीदारों के पैसों के दुरुपयोग के आरोपों को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और कई रियल एस्टेट कंपनियों से जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की है। कोर्ट ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, यूपी RERA, नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) से भी जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता वंदना सभरवाल की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में दलील दी कि यह मामला केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में कथित फंड डायवर्जन की गंभीर समस्या को उजागर करता है। उनका कहना था कि बिल्डर्स घर खरीदारों से फ्लैट के नाम पर पैसे लेते हैं, लेकिन निर्माण कार्य में लगाने के बजाय रकम को दूसरी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर कर देते हैं। बाद में कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में चली जाती हैं और खरीदारों को न घर मिलता है और न ही उनका पैसा वापस हो पाता है।
ED की जांच में सामने आया है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स और जयप्रकाश इंफ्राटेक ने करीब 25 हजार से अधिक होमबायर्स से लगभग 14,559 करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा निर्माण कार्य के बजाय संबंधित कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी अब तक करीब 400 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है, जबकि कथित गड़बड़ी 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही है।
प्रशांत भूषण ने अदालत से ED को जांच तेज करने और जिन कंपनियों या संपत्तियों में पैसा ट्रांसफर किया गया है, वहां तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की। साथ ही उन्होंने RBI से भी हस्तक्षेप की अपील की। उनका कहना था कि अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के कारण बैंकिंग सेक्टर पर भी भारी असर पड़ रहा है और बैंकों के फंसे हुए कर्ज लगातार बढ़ रहे हैं।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि हजारों घर खरीदार कई वर्षों से अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में यदि खरीदार रिफंड मांगते हैं तो उन्हें केवल पुरानी जमा राशि लौटाने की पेशकश की जाती है, वह भी बिना ब्याज के। जबकि इन फ्लैट्स की मौजूदा बाजार कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में खरीदारों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बड़े रियल एस्टेट विवाद में आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।