Friday, June 12, 2026 English edition
Indi Vox News Indi Vox News

Every Voice Matters

World

वियतनाम को ब्रह्मोस बेचकर भारत ने रचा इतिहास, इंडोनेशिया अगली कतार में

May 31, 2026 Source: Indivox News

वियतनाम को ब्रह्मोस बेचकर भारत ने रचा इतिहास, इंडोनेशिया अगली कतार में
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी वैश्विक साख को मजबूत किया है। कभी अपनी सैन्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने वाला भारत अब अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का प्रमुख निर्यातक बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने वियतनाम को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम बेचने के लिए समझौता अंतिम रूप से तय कर लिया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह की डील अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण विकास की जानकारी देते हुए बताया कि वियतनाम के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और अब केवल आधिकारिक घोषणा शेष है। वहीं इंडोनेशिया के साथ बातचीत भी लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वियतनाम के साथ करीब 60 अरब रुपये का यह रक्षा सौदा दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा। इससे न केवल भारत के रक्षा निर्यात को नई गति मिलेगी बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग भी बढ़ेगा। इससे पहले फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना था। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। यह दुश्मन के युद्धपोतों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को बेहद कम समय में निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी उच्च गति, सटीकता और मारक क्षमता इसे वैश्विक रक्षा बाजार में एक आकर्षक विकल्प बनाती है। रक्षा सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने भरोसेमंद मित्र देशों के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत वियतनाम को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। वहीं मार्च 2026 में इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस प्रणाली खरीदने में अपनी रुचि और सहमति व्यक्त की थी। इन सौदों के माध्यम से भारत न केवल अपने रक्षा उद्योग को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की सूची में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग भारत की तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है।