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भारत ने अमेरिका को दिया जवाब, ऊर्जा नीति वॉशिंगटन नहीं नई दिल्ली तय करेगी ....
June 3, 2026 Source: Indivox News
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर मतभेद सामने आए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई छूट समाप्त करने की बात कहे जाने के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसकी ऊर्जा नीति का फैसला नई दिल्ली में होगा, वॉशिंगटन में नहीं। देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तय करेगा कि उसे किस देश से और कितनी मात्रा में तेल खरीदना है।
मार्को रुबियो ने अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति की सुनवाई के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन रूस से तेल खरीदने में मदद करने वाली विशेष व्यवस्थाओं और प्रतिबंधों में दी गई छूट को जल्द समाप्त करना चाहता है। उनका कहना था कि इसी वजह से भारत जैसे देश रूस से तेल आयात कर पा रहे हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इस दौरान पश्चिमी देशों ने कभी भारत द्वारा रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदने की आलोचना की, तो कभी इसे स्वीकार भी किया।
भारत का कहना है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश की ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं और सस्ती तथा भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए किसी भी बाहरी शक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को कैसे पूरा करे।
इस मुद्दे पर चीन का भी जिक्र हो रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन आज भी रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन उसके खिलाफ अमेरिका अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाता दिखाई देता है। ऐसे में भारत में यह धारणा मजबूत हो रही है कि वैश्विक नियम और दबाव सभी देशों पर समान रूप से लागू नहीं किए जाते।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।