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हथियार छोड़ कानून का रास्ता चुना, देवजी को LAWCET में मिली 349वीं रैंक ...
June 5, 2026 Source: Indivox News
हैदराबाद। कभी माओवादी आंदोलन का हिस्सा रहे टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने जीवन में एक नई शुरुआत करते हुए तेलंगाना लॉ कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (LAWCET) में राज्य स्तर पर 349वीं रैंक हासिल की है। 5 जून को घोषित हुए परीक्षा परिणामों में देवजी ने 57 अंक प्राप्त किए, जिसके साथ वे पांच वर्षीय लॉ डिग्री कार्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए पात्र हो गए हैं।
करीब चार दशकों तक माओवादी आंदोलन से जुड़े रहने के बाद देवजी ने इस वर्ष फरवरी में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा के समाज में वापसी की थी। उनके द्वारा कानून की पढ़ाई चुनना सशस्त्र संघर्ष के रास्ते से हटकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से समाज सेवा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरेंडर के बाद देवजी ने इच्छा जताई थी कि वे कानूनी शिक्षा प्राप्त कर अपने ज्ञान का उपयोग समाज के वंचित और हाशिए पर रह रहे लोगों की सहायता के लिए करेंगे। उनका मानना है कि सामाजिक और न्याय संबंधी मुद्दों का समाधान अब संघर्ष के बजाय कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए किया जा सकता है।
इसी बीच देवजी ने अपनी अधूरी शिक्षा को भी पूरा करने की पहल की है। हाल ही में उन्होंने इंटरमीडिएट की लंबित परीक्षा का एक पेपर दिया। वर्ष 1983-85 के शैक्षणिक सत्र के दौरान वे कोरुटला जूनियर कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रेडिकल स्टूडेंट यूनियन से जुड़ने के बाद उन्होंने शिक्षा बीच में छोड़ दी थी और बाद में माओवादी आंदोलन का हिस्सा बन गए थे।
बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन से विशेष अनुमति मिलने के बाद देवजी ने 13 मई को जगतियाल जिले के कोरुटला स्थित परीक्षा केंद्र में सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। उनके परीक्षा में शामिल होने की खबर ने लोगों और मीडिया का व्यापक ध्यान आकर्षित किया। फिलहाल उस परीक्षा के परिणाम आने बाकी हैं। देवजी की यह यात्रा संघर्ष के रास्ते से शिक्षा और कानून के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणादायक कहानी बनती जा रही है।