Politics
फंड की कमी का बहाना या हकीकत? MPLADS के आंकड़ों ने खोले कई राज
June 24, 2026 Source: Indivox News
हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। पार्टी बदलने के पीछे इन सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने को मुख्य वजह बताया था। हालांकि, अब सामने आए आधिकारिक आंकड़ों ने उनके इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के आंकड़ों के अनुसार, इन छह सांसदों के पास पिछले दो वित्तीय वर्षों और मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही तक लगभग 100 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इसके बावजूद उन्होंने इस राशि का केवल 1.07 प्रतिशत से 26.84 प्रतिशत तक ही उपयोग किया। औसतन देखा जाए तो सभी सांसदों ने मिलकर करीब 13.60 करोड़ रुपये ही खर्च किए।
एमपीएलएडीएस योजना के तहत प्रत्येक सांसद को हर वर्ष 5 करोड़ रुपये मिलते हैं और जो राशि खर्च नहीं हो पाती, वह अगले वर्ष के लिए जुड़ जाती है। ऐसे में पर्याप्त धन उपलब्ध होने के बावजूद उसका सीमित उपयोग कई सवाल खड़े कर रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के सामने आने के बाद बागी सांसदों द्वारा लगाए गए ‘फंड की कमी’ के आरोपों की विश्वसनीयता पर बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि आंकड़े साफ बताते हैं कि संबंधित सांसद अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध निधि का सही तरीके से इस्तेमाल करने में असफल रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने के बाद अब वे किस फंड के प्रति वफादार हो गए हैं, इसका जवाब वही लोग दे सकते हैं।