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महिलाओं की DBT राशि बढ़ाने पर जोर, EAC-PM ने बताए कई बड़े फायदे
July 6, 2026 Source: Indivox News
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने महिलाओं के लिए राज्यों में संचालित प्रत्यक्ष नकद सहायता (Direct Benefit Transfer-DBT) योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। परिषद का मानना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए महिलाओं को हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर इस राशि में बढ़ोतरी भी की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से महिलाओं तक पहुंच सके।
ईएसी-पीएम ने अपनी रिपोर्ट में महाराष्ट्र की **'माझी लाडकी बहिन योजना'** और ओडिशा की **'सुभद्रा योजना'** का विस्तृत विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। नियमित नकद सहायता मिलने से महिलाओं की बचत बढ़ी है, घरेलू खर्च संभालने में मदद मिली है और परिवारों की वित्तीय स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
परिषद ने यह भी कहा कि केवल नकद सहायता देना ही पर्याप्त नहीं होगा। महिलाओं को डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास कार्यक्रमों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी और रोजगार व आय के नए अवसर प्राप्त कर सकेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन योजनाओं का एक बड़ा असर डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी देखने को मिला है। महिलाओं में UPI के माध्यम से भुगतान करने की आदत तेजी से बढ़ी है। अब वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और अन्य जरूरी जरूरतों पर अधिक आत्मविश्वास के साथ खर्च कर रही हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिला है।
ईएसी-पीएम के अनुसार, देश के 15 से अधिक राज्यों में ऐसी योजनाएं लागू हैं और लगभग **12 करोड़ महिलाएं** इनका लाभ उठा रही हैं। परिषद का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने से न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि उनकी वित्तीय स्वतंत्रता और देश की अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ती है। इसलिए सहायता राशि को महंगाई के अनुसार समय-समय पर संशोधित करना जरूरी है।