Thursday, July 9, 2026 English edition
Indi Vox News Indi Vox News

Every Voice Matters

World

सिंधु जल संधि विवाद पर बोलीं शेरी रहमान- एकतरफा फैसला नहीं होना चाहिए

July 9, 2026 Source: Indivox News

सिंधु जल संधि विवाद पर बोलीं शेरी रहमान- एकतरफा फैसला नहीं होना चाहिए
भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के फैसले पर पाकिस्तान की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान की सीनेटर और पूर्व जलवायु मंत्री शेरी रहमान ने भारत पर "हाइड्रो वॉर" यानी जल युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। जियो टीवी में प्रकाशित अपने लेख *India’s Hydro War on Pakistan – Part 1* में उन्होंने कहा कि भारत जल संसाधनों का इस्तेमाल पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। शेरी रहमान ने सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में से एक बताते हुए कहा कि इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का उपयोग भारत को, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का उपयोग पाकिस्तान को सौंपा गया था। उनका दावा है कि इस संधि में किसी भी पक्ष को इसे एकतरफा निलंबित या समाप्त करने का अधिकार नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पश्चिमी नदियों पर किशनगंगा, रातले, पाकल दुल, किरू, क्वार और सावलकोट जैसी जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर संधि की भावना का उल्लंघन कर रहा है। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपत्ति दर्ज करा चुका है। रहमान का कहना है कि भारत परियोजनाओं से जुड़ी पर्याप्त जानकारी साझा नहीं कर रहा और जरूरी परामर्श प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया जा रहा। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 2025 के बाद से भारत ने चिनाब नदी के जल प्रवाह से जुड़े आंकड़े साझा करना बंद कर दिया है। बगलिहार और सलाल परियोजनाओं के संचालन के दौरान जल प्रवाह में अचानक बदलाव आने का भी आरोप लगाया गया, जिस पर पाकिस्तान ने कई बार आपत्ति जताई, लेकिन भारत की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। लेख में रहमान ने भारत के कुछ नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर भी चिंता जताई और कहा कि पाकिस्तान तक पानी न पहुंचने देने जैसी टिप्पणियां क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। उन्होंने अंत में कहा कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसे कमजोर करने वाले कदम केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों ही नहीं, बल्कि वैश्विक जल समझौता व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकते हैं।