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इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयुष मलिक की पेशी, बयान के बाद मिली स्वतंत्रता
September 16, 2026 Source: Indivox News
शामली के आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध मानते हुए उसे मुक्त करने का आदेश दिया. कोर्ट में पेश आयुष ने कहा कि उसने बिना दबाव अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया और चांदनी कुरैशी से निकाह किया. बयान के बाद अदालत ने उसे अपनी मर्जी से रहने और पसंद का धर्म चुनने की स्वतंत्रता दे दी.
शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आयुष मलिक की हिरासत को अवैध माना और उसे मुक्त करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आयुष को अदालत के सामने पेश किया गया. जस्टिस संदीप जैन की सिंगल बेंच के सामने हुई सुनवाई में आयुष मलिक ने अपने बयान में अपनी स्थिति साफ की. आयुष ने अदालत को बताया कि उसने बिना किसी दबाव, भय या जबरदस्ती के अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है. उसने यह भी कहा कि चांदनी कुरैशी से उसका निकाह भी उसकी अपनी मर्जी से हुआ है.
आयुष के बयान के बाद अदालत ने उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की अनुमति दी. कोर्ट ने उसे अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की स्वतंत्रता भी दी. आयुष मलिक से जुड़ा यह मामला उसके पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद सामने आया था. छह जून को देवराज मलिक ने शामली शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने आयुष को प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराया.
शिकायत में धर्मांतरण के पीछे संपत्ति हड़पने का उद्देश्य होने का भी आरोप लगाया गया था. पुलिस ने देवराज मलिक की शिकायत के आधार पर चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी, तीन मौलवियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. एफआईआर दर्ज होने के अगले दिन यानी सात जून को पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बाद 24 जुलाई को शामली के कैराना स्थित जिला न्यायालय से दोनों को जमानत मिल गई थी. मामले में इसके बाद एक नया मोड़ आया. आयुष मलिक के दोस्त सुल्तान कारी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई
हिरासत के आरोपों के बीच कोर्ट में पेश हुआ आयुष
याचिका में आरोप लगाया गया था कि आयुष को उसके पिता देवराज मलिक ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि जिला प्रशासन की मदद से आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित की जा रही है. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नौ सितंबर के आदेश में आयुष मलिक और उसके पिता देवराज मलिक को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया था. इसी आदेश के अनुपालन में आयुष को हाईकोर्ट में पेश किया गया.
अदालत के सामने आयुष मलिक ने अपने बयान में कहा कि उसने अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है. उसने साफ तौर पर कहा कि इस दौरान उस पर किसी तरह का दबाव, भय या जबरदस्ती नहीं थी. आयुष ने चांदनी कुरैशी से निकाह को लेकर भी अदालत के सामने अपनी बात रखी. उसने कहा कि उसने अपनी मर्जी से चांदनी कुरैशी से निकाह किया है. आयुष का बयान इस मामले की सुनवाई का अहम हिस्सा रहा. उसके बयान को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उसकी स्वतंत्र इच्छा को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी मर्जी से रहने की अनुमति दे दी.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुष अपनी पसंद का धर्म चुन सकता है और अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकता है. इस तरह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अदालत के सामने उसकी अपनी बात दर्ज हुई. इस पूरे मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का मुख्य मुद्दा आयुष की कथित हिरासत था. याचिका में दावा किया गया था कि आयुष को उसके पिता ने अवैध रूप से अपने पास रखा है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान आयुष को अदालत के सामने पेश कराने का आदेश दिया. इसके बाद आयुष की अदालत में मौजूदगी हुई और उसने खुद अपने धर्मांतरण और निकाह को लेकर अपना पक्ष रखा. अदालत के सामने दिए गए बयान के बाद हाईकोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा के मुताबिक रहने और धर्म चुनने की स्वतंत्रता प्रदान की. अदालत ने उसे अपनी मर्जी से जीवन जीने की अनुमति दी.
चांदनी समेत आठ लोगों पर दर्ज हुई थी FIR
इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप जैन की सिंगल बेंच में हुई. शामली से शुरू हुआ यह मामला पिता की एफआईआर, पुलिस कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और जमानत के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट में आयुष की पेशी और उसके बयान के बाद उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अदालत का आदेश सामने आया.