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दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव में नियमों की अनदेखी पर हाईकोर्ट सख्त
September 17, 2026 Source: Indivox News
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के दौरान 16 सितंबर को हुई हिंसा और उपद्रव के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन और पुलिस चुनाव के दौरान सुरक्षा और नियमों के पालन को सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं, तो चुनाव पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के दौरान कैंपस में हुई हुड़दंगबाजी और अदालती आदेशों की धज्जियां उड़ाने की घटनाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर छात्रों और छात्र संगठनों का ऐसा ही रवैया रहा, तो छात्रसंघ चुनाव को पूरी तरह से रद्द भी कराया जा सकता है
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुए उपद्रव पर गहरी नाराजगी जताई. पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा, "अब बहुत हो चुका (इनफ इज इनज). हम इस तरह के आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते." अदालत ने चिंता जताते हुए यह भी टिप्पणी की कि हर साल चुनाव के दौरान ऐसी ही घटनाएं दोहराई जाती हैं.
16 सितंबर को नॉर्थ कैंपस में हुई हिंसक झड़प
गौरतलब है कि बीते 16 सितंबर को ही डूसू चुनाव प्रचार के दौरान नॉर्थ कैंपस में दो छात्र गुटों के बीच हाथापाई की घटना सामने आई थी. गाड़ियों के काफिले निकालकर गाड़ियों से स्टंट करने, पोस्टर चिपकाकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा नियमों को ताक पर रखने की कई खबरें भी कैंपस से आ रही हैं. 16 सितंबर की इस हिंसा ने पूरे दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी नियमों के पालन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे.
हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर की गई कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हुआ, तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी जाएगी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता.
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहते हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी, तो कोर्ट चुनाव की पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश देने में जरा भी संकोच नहीं करेगा. मामले की अगली सुनवाई के दौरान प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी