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भारत का बड़ा कदम: BRICS के साथ मिलकर डिजिटल पेमेंट नेटवर्क, डॉलर पर असर संभव
April 30, 2026
भारत अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। वैश्विक स्तर पर ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मुद्राओं में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे भारतीय रुपया भी प्रभावित हुआ और डॉलर के मुकाबले 95 रुपये से ऊपर पहुंच गया। इसी पृष्ठभूमि में भारत, ब्रिक्स समूह के अन्य देशों के साथ मिलकर एक नए डिजिटल पेमेंट सिस्टम के विकास की योजना बना रहा है।
यह प्रस्ताव Reserve Bank of India द्वारा रखा गया है, जिसमें सीमा-पार लेनदेन को स्थानीय मुद्राओं में करने की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर की अस्थिरता, पश्चिमी प्रतिबंधों और टैरिफ के प्रभाव को कम करना है। इस पहल से सदस्य देशों को पश्चिमी वित्तीय सिस्टम पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्रिक्स देश पश्चिम-नियंत्रित भुगतान चैनलों से कितनी दूरी बना पाते हैं, बिना अमेरिका को असहज किए। आगामी ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक (14-15 मई, नई दिल्ली) और सितंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
BRICS, जिसकी शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने की थी, अब एक बड़ा आर्थिक समूह बन चुका है जिसमें दक्षिण अफ्रीका सहित कई नए सदस्य शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नया पेमेंट सिस्टम सदस्य देशों को आर्थिक झटकों से बचाने और तेज, लगभग रियल-टाइम भुगतान की सुविधा देने में सहायक होगा।
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका मानना है कि भारत को इस कदम से पहले अमेरिका, विशेषकर Donald Trump जैसे नेताओं की संभावित प्रतिक्रिया को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि यह डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती देने के रूप में देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह पहल वैश्विक वित्तीय संतुलन में बदलाव की दिशा में एक रणनीतिक कदम हो सकती है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों को संतुलित ढंग से संभालना जरूरी होगा।