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बोरे बासी दिवस पर सियासत तेज, मंत्री गजेंद्र ने पूर्व CM बघेल को घेरा
May 3, 2026
छत्तीसगढ़ में “बोरे बासी दिवस” को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। श्रमिक दिवस (1 मई) के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाकर इस दिवस को मनाने के बाद सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक प्रचार (प्रोपेगेंडा) करार दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री पर तीखे सवाल उठाए हैं।
मंत्री गजेंद्र यादव ने रविवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल के इस कदम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाना सिर्फ एक दिखावा है और इसे राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हिंदू परंपराओं में मिट्टी के बर्तन का उपयोग पिंडदान और पितृ भोज जैसे धार्मिक कर्मकांडों में किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस पार्टी का “पिंडदान” करने गए थे?
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस इस तरह के आयोजनों के जरिए क्या संदेश देना चाहती है, यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या छत्तीसगढ़ के लोगों को केवल बोरे बासी ही खाने तक सीमित किया जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के अलावा मंत्री गजेंद्र यादव ने आगामी पांच राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में रहेंगे और कई राज्यों में पार्टी की स्पष्ट सरकार बनने जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा “सुनामी” के रूप में सत्ता में वापसी करेगी और पांच में से कम से कम तीन राज्यों में भाजपा की सरकार बनेगी।
इसी दौरान उन्होंने राज्य सरकार की एक नई योजना की जानकारी भी दी। मंत्री ने बताया कि मेरिट लिस्ट में स्थान पाने वाले 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को सरकार की ओर से 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनका कहना था कि इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई में मदद मिलेगी और वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।
इसके अलावा, बच्चों को हेलीकॉप्टर यात्रा कराने के मुद्दे पर भी मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में बच्चों को केवल एक बार हेलीकॉप्टर यात्रा कराई जाती थी, जबकि वर्तमान योजना के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता से छात्र अपने परिवार के साथ बेहतर शैक्षिक या पर्यटन अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
इस पूरे विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां परंपरा, संस्कृति और विकास योजनाएं अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई हैं।