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2026 ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग: कौन है नंबर-1 और भारत कहां

May 3, 2026

2026 ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग: कौन है नंबर-1 और भारत कहां
2026 के लिए जारी Henley Passport Index ने एक बार फिर दुनिया के देशों के पासपोर्ट की ताकत को उजागर किया है। यह रैंकिंग इस बात पर आधारित होती है कि किसी देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के यात्रा कर सकते हैं। इस बार भी वैश्विक स्तर पर पासपोर्ट ताकत में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जहां सबसे मजबूत और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच लगभग 170 देशों का अंतर है। इस सूची में सबसे ऊपर Singapore का पासपोर्ट है, जिसके नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। यह लगातार कई वर्षों से दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है। इसके बाद दूसरे स्थान पर Japan, South Korea और United Arab Emirates हैं, जिनके नागरिक 187 देशों तक वीजा-फ्री पहुंच रखते हैं। खास बात यह है कि UAE का पासपोर्ट एशिया के बाहर सबसे मजबूत माना जाता है। यूरोप के कई देश भी शीर्ष रैंकिंग में शामिल हैं, जैसे Switzerland और Norway, जिनके नागरिक लगभग 185 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। यूरोपीय संघ के देशों का औसत भी काफी मजबूत है, जो लगभग 183 देशों तक पहुंच प्रदान करता है। वहीं United States का पासपोर्ट 179 देशों के साथ थोड़ा नीचे खिसक गया है, जबकि United Kingdom 183 देशों के साथ बेहतर स्थिति में बना हुआ है। भारत की बात करें तो India का पासपोर्ट इस रैंकिंग में 80वें स्थान पर है। भारतीय नागरिक लगभग 55 से 58 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। हालांकि यह संख्या पहले के मुकाबले बेहतर मानी जा रही है, फिर भी वैश्विक स्तर पर भारत अभी मध्यम श्रेणी में आता है। दूसरी ओर, Pakistan का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्टों में शामिल है। यह 98वें स्थान पर है और इसके नागरिक केवल लगभग 31 से 35 देशों में ही बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। इसी श्रेणी में कई अफ्रीकी देश भी शामिल हैं, जहां राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा कारणों से वीजा प्रतिबंध अधिक हैं। कुल मिलाकर, यह रैंकिंग साफ दिखाती है कि किसी देश की कूटनीति, राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक संबंध उसके नागरिकों की यात्रा स्वतंत्रता को सीधे प्रभावित करते हैं। मजबूत पासपोर्ट वाले देशों के नागरिकों के लिए दुनिया अधिक खुली है, जबकि कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अभी भी चुनौती बनी हुई है।