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दिल्ली हाई कोर्ट बोला- बाजारों में अव्यवस्था स्वीकार नहीं

May 6, 2026 Source: Indivox News

दिल्ली हाई कोर्ट बोला- बाजारों में अव्यवस्था स्वीकार नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि इन बाजारों को अव्यवस्था का कारण नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि इन बाजारों को नियमों और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत ही संचालित किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय निवासियों को असुविधा न हो और सार्वजनिक व्यवस्था भी बनी रहे। यह टिप्पणी जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह याचिका उत्तम नगर के निवासी वेद प्रकाश द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने अपने क्षेत्र में हर सोमवार लगने वाले साप्ताहिक बाजार को हटाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि बाजार के लगने के दौरान इलाके में भारी अतिक्रमण हो जाता है। इससे सड़कों पर जाम की स्थिति बनती है और स्थानीय लोगों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में अदालत के सामने तस्वीरें भी पेश कीं। इन तस्वीरों को देखने के बाद अदालत ने माना कि बाजार वाले दिन और सामान्य दिनों की स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है, जिससे यह साबित होता है कि व्यवस्था में कमी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि साप्ताहिक बाजारों के संचालन के लिए ठोस नियम बनाए जाने आवश्यक हैं। इनमें यह तय होना चाहिए कि कितने विक्रेता बाजार में बैठ सकते हैं और वे कितना स्थान घेर सकते हैं। अदालत का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल भीड़ और अतिक्रमण नियंत्रित होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानियां भी कम होंगी। एमसीडी की ओर से अदालत को बताया गया कि दिल्ली सरकार इस समस्या के समाधान के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रही है। इस योजना का उद्देश्य साप्ताहिक बाजारों को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित तरीके से संचालित करना है। इसके तहत नए दिशा-निर्देश लागू करने पर विचार किया जा रहा है। अदालत ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि वह इस प्रस्तावित योजना की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द अदालत में प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को तय की गई है। कुल मिलाकर, अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि साप्ताहिक बाजारों को पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें सुव्यवस्थित और नियंत्रित तरीके से चलाना जरूरी है। इससे जहां छोटे व्यापारियों की आजीविका सुरक्षित रहेगी, वहीं स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी और क्षेत्र में व्यवस्था बनी रहेगी।