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करकाभाट की अनसुनी कहानी: विशाल पत्थरों में छिपे हैं सभ्यता के राज
May 10, 2026 Source: Indivox News
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित करकाभाट आज इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक रहस्यमयी और आकर्षक स्थल बन चुका है। विशाल पत्थरों और प्राचीन संरचनाओं से घिरा यह स्थान हजारों साल पुरानी सभ्यता की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है। यहां मौजूद महापाषाण युगीन कब्रें और शैलाश्रय इस बात के प्रमाण हैं कि इस क्षेत्र में प्राचीन मानव सभ्यता का अस्तित्व था।
जानकारों के अनुसार, साल 1991 में भारतीय पुरातत्व अनुसंधान टीम ने करकाभाट का विस्तृत निरीक्षण किया था। इस दौरान करीब 3500 साल पुराने महापाषाण कालीन अवशेष मिलने की पुष्टि हुई। करकाभाट और आसपास के 7 से 8 गांवों के लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में करीब 5000 प्राचीन कब्रों के अवशेष पाए गए। इन कब्रों की संरचना बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि अधिकांश कब्रें उत्तर से दक्षिण दिशा में बनाई गई हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि बड़ी कब्रों में सामूहिक दफन और छोटी कब्रों में पति-पत्नी को साथ दफनाने के संकेत मिले हैं। कई कब्रों से भाले के अग्रभाग, तीरों की नोक, पत्थर के औजार और तांबे के आभूषण जैसे अवशेष भी मिले हैं। इससे पता चलता है कि उस समय यहां रहने वाले लोग तकनीक, युद्धकला और सामाजिक व्यवस्था में काफी विकसित थे।
करकाभाट की ऐतिहासिक महत्ता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रही है। हाल ही में दक्षिण कोरिया से आए विदेशी पर्यटकों और शोधकर्ताओं ने इस स्थल का दौरा किया और यहां की संरचनाओं को देखकर आश्चर्य जताया। उन्होंने इसे विश्वस्तरीय ऐतिहासिक धरोहर बताया, लेकिन संरक्षण की कमी पर चिंता भी व्यक्त की।
स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का मानना है कि यदि करकाभाट का सही तरीके से संरक्षण और विकास किया जाए, तो यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन और शोध केंद्र बन सकता है। फिलहाल प्रशासन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण कई प्राचीन पत्थर और संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके बावजूद करकाभाट आज भी अपने भीतर हजारों वर्षों का इतिहास और रहस्य समेटे खड़ा है।