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किम जोंग उन को लेकर बड़ा बदलाव, अब हमला हुआ तो सीधा न्यूक्लियर रिएक्शन

May 10, 2026 Source: Indivox News

किम जोंग उन को लेकर बड़ा बदलाव, अब हमला हुआ तो सीधा न्यूक्लियर रिएक्शन
उत्तर कोरिया से जुड़ी हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश ने अपने परमाणु सिद्धांत में बड़ा और गंभीर बदलाव किया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। यह कदम कथित तौर पर उस घटना के बाद आया है, जिसमें ईरान में अमेरिकी और इजराइली हमलों के दौरान सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei और उनके कुछ सलाहकारों के मारे जाने की खबरों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी थी। इसी घटना को देखकर Kim Jong Un और उत्तर कोरिया की सरकार सतर्क हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, North Korea ने अपने संविधान में संशोधन कर दिया है। इस नए प्रावधान के अनुसार यदि किम जोंग उन की हत्या होती है या देश की कमांड और नियंत्रण प्रणाली किसी विदेशी हमले में नष्ट हो जाती है, तो उत्तर कोरिया की सेना को बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा। इसका मतलब है कि अब परमाणु हमले के लिए किसी राजनीतिक आदेश या मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह संशोधन मार्च में प्योंगयांग में हुई सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक में पारित किया गया था। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार यह नीति पहले अनौपचारिक रूप से मौजूद थी, लेकिन अब इसे संविधान में लिखित रूप देकर और मजबूत कर दिया गया है। उत्तर कोरिया का कहना है कि यह कदम उसकी “प्रतिरोध क्षमता” और नेतृत्व सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे ईरान की घटना का बड़ा प्रभाव है। प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव जैसे विश्लेषकों के अनुसार, इस घटना ने उत्तर कोरिया को यह एहसास कराया कि किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ निशाना बनाना संभव है। इसी डर के चलते प्योंगयांग अब अपने परमाणु सिस्टम को और अधिक स्वचालित और त्वरित बना रहा है। इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई तोपखाना और सैन्य हथियारों की तैनाती भी तेज कर दी है। नई 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड गन जैसे हथियारों की रेंज लगभग 60 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जिससे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल भी खतरे के दायरे में आ सकती है। उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अभी भी युद्ध की स्थिति में हैं, क्योंकि 1953 के युद्ध के बाद कोई शांति संधि नहीं हुई थी। ऐसे में यह नया परमाणु प्रावधान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। कुल मिलाकर, यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपने नेतृत्व की सुरक्षा और परमाणु रणनीति को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है, जिससे पूर्वी एशिया में सुरक्षा संतुलन और अधिक अस्थिर हो सकता है।