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रुपये में हड़कंप! डॉलर की तेज छलांग ने बढ़ाई महंगाई की टेंशन
May 11, 2026 Source: Indivox News
सोमवार, 11 मई 2026 को भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में हलचल मच गई। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे टूटकर 94.88 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 94.48 पर बंद हुआ था। इस अचानक आई कमजोरी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की प्रतिक्रिया को “अस्वीकार्य” बताया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता कमजोर पड़ती दिखाई दी। इसका असर सीधे तेल बाजार पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से अधिक बढ़कर लगभग 104.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर देश का आयात बिल भी बढ़ जाता है। तेल कंपनियों को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में रुपया तेल की कीमतों के साथ काफी करीब से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
ईरान की ओर से यह संकेत भी मिले हैं कि वह प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की मान्यता जैसी शर्तें रख रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया में तेल सप्लाई का बेहद अहम मार्ग माना जाता है। इसलिए इस क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
तेल कीमतों में तेजी का असर भारतीय बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा। देश की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7% के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि कुछ बैंकरों का कहना है कि हाल के सत्रों में ऑफशोर बाजारों में डॉलर की लंबी पोजिशन कम होने से रुपये को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन मौजूदा हालात अभी भी काफी संवेदनशील बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही और कच्चा तेल महंगा बना रहा, तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। वहीं, ट्रेजरी विशेषज्ञ अनिल भंसाली का कहना है कि सरकार और रिजर्व बैंक संभवतः डॉलर को 100 रुपये के स्तर तक पहुंचने से रोकने की कोशिश करेंगे, क्योंकि यह आर्थिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है।