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नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा: ईरानी नेता की सत्ता कमजोर, बंकर में छिपा

May 11, 2026 Source: Indivox News

नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा: ईरानी नेता की सत्ता कमजोर, बंकर में छिपा
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी चैनल CBS News के कार्यक्रम *60 Minutes* में दिए एक इंटरव्यू में ईरान को लेकर कई बड़े और विवादित दावे किए हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव और टकराव की स्थिति बनी हुई है। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान के वर्तमान नेतृत्व में गंभीर कमजोरी देखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सत्ता पर उतनी मजबूत पकड़ नहीं रखते, जितनी उनके पिता अली खामेनेई की थी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी शासन अब पहले की तुलना में अधिक अस्थिर और आंतरिक मतभेदों से जूझ रहा है। उनके अनुसार, ईरान के भीतर दो प्रमुख गुट सक्रिय हैं—एक पक्ष संघर्ष और सख्त रुख बनाए रखना चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष लगातार तनाव और आर्थिक दबाव के कारण संभावित जन विद्रोह और आर्थिक गिरावट को लेकर चिंतित है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि हाल के संघर्षों के बाद ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन बढ़े हैं और जनता में असंतोष गहराया है। इंटरव्यू में यह भी कहा गया कि ईरानी नेतृत्व अपनी जनता से अधिक डर महसूस कर रहा है, और इसी कारण कई नेता कथित रूप से सुरक्षित ठिकानों या बंकरों में रहकर काम कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी दावा किया गया कि हालिया हमलों में ईरान के कुछ उच्च अधिकारियों को गंभीर नुकसान हुआ है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। नेतन्याहू ने आगे कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों से ईरान के पेट्रोकेमिकल, स्टील और मिसाइल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और देश के पास अभी भी यूरेनियम और मिसाइल क्षमता मौजूद है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और इजराइल भविष्य में आवश्यक होने पर ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं, हालांकि कूटनीति और आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान की कमजोरी का असर उसके सहयोगी संगठनों जैसे हिजबुल्लाह, हमास और हूती समूहों पर भी पड़ रहा है, जिनकी सैन्य क्षमता को इजराइल द्वारा बड़े पैमाने पर कमजोर किया गया है। कुल मिलाकर, यह बयान क्षेत्रीय तनाव, भू-राजनीतिक संघर्ष और ईरान की आंतरिक स्थिति को लेकर कई विवादित दावों को सामने रखता है, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।