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कोलकाता आग हादसा: 2 की मौत, 3 गंभीर, मंत्री ने TMC को घेरा
May 12, 2026 Source: Indivox News
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक दर्दनाक अग्निकांड सामने आया है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह घटना शहर के तपसिया इलाके के जीजे खान रोड स्थित चार मंजिला इमारत में हुई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आग इमारत की दूसरी मंजिल पर अचानक लगी और कुछ ही समय में तेजी से पूरी मंजिल में फैल गई। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वहां मौजूद पांच लोग बाहर निकलने में असमर्थ रहे। जान बचाने के लिए सभी लोग बाथरूम में छिप गए, लेकिन वहां घना काला धुआं भर जाने के कारण उनका दम घुटने लगा।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद फायरफाइटर्स ने सभी फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला और उन्हें कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज (National Medical College) अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
दमकल अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया है, हालांकि विस्तृत जांच अभी चल रही है ताकि वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सके। प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
हादसे के बाद पूरे इलाके में तनाव और भय का माहौल है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी की गई थी।
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घटनास्थल का दौरा किया और गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित इमारत के पास आवश्यक फायर एनओसी और लाइसेंस नहीं था, इसके बावजूद वहां गतिविधियां चल रही थीं, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में अवैध इमारतों को लंबे समय से बढ़ावा दिया गया है, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। उन्होंने पिछले कुछ अन्य अग्निकांडों का भी उल्लेख किया और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा किया।
यह घटना एक बार फिर शहरी इमारतों में फायर सेफ्टी नियमों की गंभीर अनदेखी और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करती है।