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17 दिग्गज CEOs संग ट्रम्प चीन पहुंचे, जिनपिंग से 7 मुद्दों पर बातचीत
May 13, 2026 Source: Indivox News
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2017 के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर रवाना हुए हैं। वे 12 मई की रात बीजिंग के लिए निकले और 13 से 15 मई तक चीन में रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान युद्ध के कारण, स्थिति को और अधिक जटिल बना रहा है। माना जा रहा है कि यह यात्रा अमेरिका-चीन संबंधों को स्थिर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है।
ट्रम्प इससे पहले 2017 में चीन गए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने लगे थे। इस बार उनका यह दौरा पहले से अधिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 14 और 15 मई को अलग-अलग दौर की बातचीत होने की संभावना है।
इस बैठक में कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें व्यापार और टैरिफ नीतियां, बोइंग विमान की संभावित बड़ी डील, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों का व्यापार, रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और अन्य तकनीकी क्षेत्र, ताइवान का राजनीतिक मुद्दा और ईरान युद्ध जैसे संवेदनशील विषय शामिल हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान लगभग 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोइंग डील भी हो सकती है, जो वैश्विक विमानन उद्योग के लिए बड़ी घटना साबित हो सकती है।
इस दौरे की एक खास बात यह भी है कि ट्रम्प के साथ दुनिया के कई बड़े कारोबारी नेता भी शामिल हैं। इनमें टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क, एप्पल के सीईओ टिम कुक, बोइंग के नए CEO रॉबर्ट ‘केली’ ऑर्टबर्ग और एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग सहित कुल 17 शीर्ष बिजनेस लीडर शामिल हैं। एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह भी बताया कि वह और एनवीडिया के जेन्सन हुआंग ही एयरफोर्स वन विमान में ट्रम्प के साथ मौजूद हैं।
इस यात्रा से पहले एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि चीन ने अमेरिकी नेता मार्को रुबियो पर पहले से प्रतिबंध लगाए हुए हैं। ये प्रतिबंध उनके चीन विरोधी बयानों के कारण लगाए गए थे। हालांकि, चीन ने हाल ही में उनके नाम की चीनी भाषा में ट्रांसलिटरेशन बदल दी है, जिससे माना जा रहा है कि यह प्रतिबंधों को तकनीकी रूप से अलग तरीके से संभालने की कोशिश हो सकती है, ताकि भविष्य में किसी संभावित यात्रा या कूटनीतिक स्थिति में बाधा न आए।
कुल मिलाकर, यह चीन दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार, तकनीक और भू-राजनीति के भविष्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।