Monday, May 18, 2026 English edition
Indi Vox News Indi Vox News

Every Voice Matters

India

अबूझ रास्तों से विकास की ओर: नक्सलियों का ट्रैक्टर प्रशिक्षण शुरू

May 18, 2026 Source: Indivox News

अबूझ रास्तों से विकास की ओर: नक्सलियों का ट्रैक्टर प्रशिक्षण शुरू
*​बंदूक छोड़ थामा ट्रैक्टर का स्टीयरिंग: नारायणपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों की नई शुरुआत* *साइकिल न छूने वाले अब सीख रहे ट्रैक्टर चलाना और मरम्मत* *लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़े 40 पुनर्वासित* ​रायपुर, 18 मई 2026/ नारायणपुर जिले का लाइवलीहुड कॉलेज (पुनर्वास केंद्र) आज उन हाथों को नई जिंदगी दे रहा है, जो कभी भटककर बंदूक थाम चुके थे। जिला प्रशासन की अनूठी पहल से आत्मसमर्पित नक्सली अब न केवल समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। *​वोटर आईडी कार्ड से मिली 'नई पहचान'* ​पुनर्वासित लोगों को शासकीय सेवाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में ​8 पुनर्वासित लोगों को नए वोटर आईडी कार्ड बनाकर वितरित किए गए हैं। इसी तरह ​25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) पूरा किया जा चुका है। लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने ​40 लोगों से फॉर्म-6 भरवाए गए हैं। ​ *"कभी साइकिल नहीं चलाई, अब चलाना है ट्रैक्टर"* ​हाल ही में कलेक्टर ने पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रहे 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उनके सामने एक विशेष इच्छा जाहिर की। वे ट्रैक्टर चलाना सीखने के साथ-साथ उसकी मरम्मत और रखरखाव (मेन्टेनेंस) का प्रशिक्षण पाना चाहते थे। यह मांग इसलिए भी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी। ​कलेक्टर ने इस मांग की संवेदनशीलता और उनके उत्साह को भांपते हुए बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई की। नतीजतन, सोमवार से ही लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रैक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत कर दी गई। *​बदलाव की नई इबारत* अब ये सभी पुनर्वासित लोग नियमित रूप से ट्रैक्टर चलाने की बारीकियां सीख रहे हैं। प्रशिक्षण में उन्हें ड्राइविंग के साथ-साथ ट्रैक्टर की तकनीकी जानकारी और रिपेयरिंग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। ​यह प्रशिक्षण केवल एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम नहीं है, बल्कि इन परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत जरिया बनने जा रहा है। *खौफ के साए से उम्मीद की धूप तक* ​आज नारायणपुर के इस पुनर्वास केंद्र में रहने वालों के चेहरों पर अतीत की अस्थिरता और डर की जगह भविष्य के प्रति आत्मविश्वास और संतोष साफ देखा जा सकता है। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर ये लोग अब एक सामान्य नागरिक की तरह देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं। ​नारायणपुर का यह केंद्र अब महज एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि परिवर्तन, विश्वास और एक नई शुरुआत का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।