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बंगाल में बकरीद से पहले सियासत गरम, हुमायूं कबीर का विवादित बयान

May 21, 2026 Source: Indivox News

बंगाल में बकरीद से पहले सियासत गरम, हुमायूं कबीर का विवादित बयान
पश्चिम बंगाल में बकरीद (ईद-उल-अज़हा) से पहले गाय की कुर्बानी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के बयान ने इस मुद्दे को और अधिक गरमा दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि गाय की कुर्बानी को कोई भी नहीं रोक सकता और इस परंपरा को धार्मिक अधिकार के रूप में जारी रखा जाएगा। हुमायूं कबीर ने अपने बयान में कहा कि कुर्बानी की परंपरा लगभग 1400 वर्षों से चली आ रही है और जब तक दुनिया रहेगी, यह प्रथा जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गाय, बकरी, ऊंट और दुम्बा जैसे जायज पशुओं की कुर्बानी को रोका नहीं जा सकता। उनके अनुसार, यह एक धार्मिक परंपरा है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई इस पर आपत्ति करता है, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाएगा और कुर्बानी की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। यह विवाद तब और बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ‘वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट 1950’ के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय और भैंस की हत्या पर सख्त रोक रहेगी। इसके अनुसार, बिना प्रमाण पत्र के किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस को मारा जाना अवैध माना जाएगा। बकरीद से पहले जारी इस नोटिस को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हुमायूं कबीर ने इस सरकारी कदम की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार केवल नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक परंपराओं को रोक नहीं सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान समुदाय किसी भी हालत में कुर्बानी के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगा। अपने बयान में उन्होंने आर्थिक पहलू का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत में स्लॉटर हाउस पहले से ही लाइसेंस प्राप्त हैं और सरकार स्वयं बीफ के निर्यात से राजस्व अर्जित करती है। इस आधार पर उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल उठाए। हुमायूं कबीर का विवादों से पुराना संबंध रहा है। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद उन्हें उनकी पूर्व पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। बाद में उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और राजनीति में नई पहचान बनाई। वे रेजीनगर और नॉवदा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है, खासकर बकरीद से ठीक पहले।